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क्यों हैं मोदी के लोकडाऊन को देशव्यापी स्वीकार्यता

भारत को कोरोना वैश्विक महामारी से बचाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने सम्पूर्ण देश में 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू लगाया था जिसका पूरे भारत में शाम को पाँच बजे घंटियाँ बजाकर स्वागत किया गया था| उन्होंने 24 मार्च को पुन: राष्ट्र के नाम संदेश दिया और घोषणा की कि 25 मार्च से 14 अप्रैल तक पूरे भारत में लोकडाऊन रहेगा और तब से ही सम्पूर्ण भारत में लोकडाऊन जारी है | तीन सप्ताह अर्थात इक्कीस दिन की भारतबंदी आमतौर पर शांतिपूर्ण तरीके से मनाई जा रही है | सभी आवश्यक सेवाएं जैसे बिजली पानी तथा प्रशासनिक सेवाए पूरी तरह बहाल है |

मोदी जी ने बीते शुक्रवार देशवासियों से अनुरोध किया की 5 अप्रैल को शाम 9 बजे, सिर्फ 9 मिनट के लिए दीया जलाएं और पुरे विश्व को ये सन्देश दें की चाहे हम एक दूसरे से दूर ही क्यों न हो पर इस महामारी के समय में हम सब साथ है

संवाद करने का निराला अंदाज़

क्यों मोदी जी की हार बात का देश खुले हांथों से स्वागत करता है ? ढूंढते रह जाओगे !! इसका कोई एक उत्तर नहीं है । लेकिन हाँ, अपनी बात को सहजता से रखने के अनूठे अंदाज़ से मोदी जी को हर परिवार में जगह मिली है । हर कोई उन्हें अपने परिवार का सदस्य ही मानता है । इस संकट की घड़ी में भी हर कोई ये जान और मान रहा है कि कोरोना के इस भंवर में मोदी जी ही नैया पर लगवाएंगे ।

कनाडा जैसा विकसित देश जहाँ का जनसंख्या घनत्व केवल चार प्रति वर्ग किलोमीटर है , कोरोना को फैलने से रोक नहीं पा रहा है । ऐसे में कोरोना की महामारी को समझ कर सही निर्णय समय-समय पर जनता के साथ साझा कर उन्होंने देश को इसके संकट से निकालने की राह दिखाई है| मार्च माह का मोदी जी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम कोरोना को ही समर्पित रहा | कोरोना की बीमारी में सामाजिक दूरी रखने का महत्व मोदी जी ने लोगों को समझाया तथा यह भी समझाया कि इसके अलावा कोरोना को महामारी बनने से रोकने का कोई तरीका नहीं है | भारत की जनता इससे पूर्णत: आश्वस्त हुई है|

विरोधियों के गले की हड्डी

आज दुनिया के लिए और स्वयं भारत में विरोधियों के लिए यह चौकाने वाला विषय है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इतना व्यापक जनसमर्थन लोकडाऊन पर कैसे मिल रहा है ? भारत के विपक्षी दलों के लिए यह गहरी ईर्ष्या और चिंतन का कारण है क्योंकि देश के एक हो जाने से ‘फूंट डाल शासन कर’ की राजनीति काम नहीं आ रही है । यही वजह है की रोज़ रोज़ कोई न कोई खबर आ ही जाती है जिसमें प्रधानमंत्री के प्रबंधन को चोट पहुंचाने की साजिश की गयी होती है |

इसलिए कहते हैं ‘मोदी है तो मुमकिन है’

भारत प्रेमपूर्वक और शांतिपूर्ण तरीके से जीने का अभ्यस्त है और उत्सवप्रेमी देश है | यहाँ होली व रामनवमी देश के बड़े त्योहार हैं जो समाज में सदभाव और सामाजिक दूरियाँ समाप्त करने के लिए हजारों वर्षों से मनाये जा रहे हैं | लेकिन कोरोना के चलते और मोदी की अपील पर लोगों ने अपने-अपने घरों में रहकर ही इन उत्सवों को बड़ी सादगी से मनाया | यह बहुत अनूठी बात है | यह मोदी के रहते ही संभव है | इसलिए भारत में कहते हैं कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’ | 

 

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